


ग्रामीणों ने मरम्मत और निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल, समय रहते सुधार की मांग
25 सितम्बर 2026 राजनांदगांव।
बारिश के मौसम में खातूटोला बैराज की मेड़ में दोबारा बड़ा गड्ढा दिखाई देने के बाद ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की निर्माण एवं मरम्मत व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान इसी स्थान पर मेड़ क्षतिग्रस्त होकर गड्ढा बन गया था।
इसकी सूचना विभाग को दिए जाने के बाद मरम्मत कराए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए ग्रामीण उस मरम्मत की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर चिंता जता रहे हैं।एक साल में फिर वही स्थिति, मरम्मत की स्थिति स्पष्ट करने की मांगग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष बारिश के दौरान बैराज की मेड़ में बने गड्ढे की जानकारी विभाग को दी गई थी।
इसके बाद मरम्मत कार्य कराया गया। अब उसी स्थान पर गड्ढा फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इससे ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और उसके बाद किए गए विभागीय निरीक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि यदि मरम्मत निर्धारित मापदंडों के अनुरूप की गई थी, तो इतनी कम अवधि में उसी स्थान पर दोबारा क्षति होने के कारणों की जांच की जानी चाहिए।
इस संबंध में सिंचाई विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। विभाग का पक्ष मिलने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में चिंताग्रामीणों का कहना है कि बैराज जैसी महत्वपूर्ण सिंचाई संरचना में मरम्मत कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप और टिकाऊ होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि मेड़ कमजोर है और समय रहते इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो लगातार बारिश के दौरान क्षति बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि स्थिति गंभीर होने पर आसपास के क्षेत्र में जन-धन और कृषि भूमि को नुकसान हो सकता है।
हालांकि, संभावित नुकसान की वास्तविक स्थिति तकनीकी निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांगग्रामीणों ने मांग की है कि खातूटोला बैराज में पिछले वर्ष कराए गए मरम्मत कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए। उन्होंने मरम्मत में इस्तेमाल सामग्री, कार्य की मात्रा, स्वीकृत राशि, ठेकेदार या एजेंसी तथा विभागीय निरीक्षण से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
साथ ही वर्तमान क्षति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराकर आवश्यक स्थायी मरम्मत कराने की मांग भी की गई है।बड़ा सवाल—बार-बार क्षति के कारणों की जांच क्यों नहीं?खातूटोला बैराज की मौजूदा स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। यदि पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की गई थी, तो एक वर्ष के भीतर उसी स्थान पर दोबारा गड्ढा बनने के कारणों की जांच आवश्यक है। ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं और कार्य पूरा होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था या नहीं।ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय तकनीकी जांच के आधार पर गुणवत्तापूर्ण और स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी बारिश में क्षति बढ़ सकती है। इस संबंध में विभागीय निरीक्षण और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट : एन के सिन्हा
