नैनीताल। सरोवर नगरी व उसके आसपास समेत पूरे हिन्दुस्तान में सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना कर वट सावित्री ब्रत लेकर अपने अपने पति की दीर्घायु व पूरे परिवार जनों के स्वस्थ रहने की कामना के लिए निर्जला व्रत लिया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं का जमावड़ा मंदिरों एवं घर के आसपास आचार्य एवं पंडित जी को बुलाकर विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। पूजा अर्चना के बाद ही सुहागिन महिलाओं ने जल धारण किया। इस अवसर पर समाजसेवी एवं शिक्षिका सुनीता जोशी ने विस्तार से बताया उन्होंने कहा पौराणिक युग से मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएं वट सावित्री माँ की पूजा अर्चना कर व्रत धारण करती है उसके दुःख को माँ सावित्री हर लेती है। शिक्षका सुनीता जोशी ने बताया उन्होंने कहा माँ सावित्री भगवान की बहुत बड़ी भक्त के साथ साथ समझदार व चुतर महिला थी। उनको वरदान दिया गया था जिसके साथ तेरी शादी होगी वह अल्प आयु में मर जायेगा।पर सावित्री ने एक भी नही सुनी और उन्होंने सत्यवान के साथ अपना विवाह कर लिया अब समय अल्पायु का आ गया और वह भी अपने स्वामी के साथ वन को चली गई जबकि रोज ही सत्यवान वन जाकर लकड़ी आदि लाता था। समय आ गया और सावित्री ने जान लिया तो वह भी सत्यवान के साथ साथ वन को चलेगी। जैसे ही सत्यवान रोज की भांति लकड़ी आदि काटने की तैयारियां कर रहा था। वेसे ही वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर पड़ा और कुछ ही क्षण में सत्यवान के प्राण पखेरू उड़ गए। अब सावित्री जंगल में अकेले रोना धोना शुरू कर दिया। इतने में ही यमराज सत्यवान के प्राण लेने के लिए आ गए। और सत्यवान के प्राणों को लेकर जाने लग गये तो सावित्री भी उनके पीछे पीछे चल दी । थोड़ी दूर जाकर यमराज ने देखा सावित्री उनके पीछे पीछे चली आ रही है तो उन्होंने कहा तुम्हारी पूजा अर्चना से में प्रसन्न हूँ। तुम मुझसे कुछ भी वरदान मांग लो। सावित्री ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत अपनी सास ससुर का स्वास्थ्य ठीक व खोया हुआ राजपाठ मांग लिया। यमराज ने तथास्तु कह कर उनका राजपाठ दे दिया। उसके बाद यमराज फिर चल दिये तो सावित्री उनके पीछे पीछे फिर जाने लग गई। तो यमराज ने कहा अब क्या चाहती हो एक वरदान और मांग लो। सावित्री ने बहुत चालाकी से यमराज से पुत्र वान होने का वरदान मांग लिया। यमराज ने विना सोचे समझे तथास्तु कह दिया। और सत्यवान के प्राणों को ले जाये रहे हैं। फिर कुछ दूरी में जाकर देखा सावित्री फिर यमराज के पीछे पीछे चल रही है अब क्या हो गया यमराज का शब्द था। सावित्री ने बड़े सरल स्वभाव एवं बहुत ही चतुरता से उतर दिया । हे यमराज देवता आपने मुझे पुत्र होने का वरदान तो दे दिया पर मेरे प्राणनाथ के प्राण आप ले जा रहे हैं में पुत्र वान कैसे बनुगी। इस पर यमराज ने सावित्री की बात को रख कर उसकी चतुरता को देखते हुए उसके प्राणनाथ के प्राणों को लौटा दिया और वह खुशी खुशी अपने घर आ गए। तब से आज भी सुहागिन महिलाओं का वट सावित्री व्रत पर पूरा विश्वास बना हुआ है कि वह अपने प्राणनाथ के स्वस्थ एवं दीर्घायु की कामना कर पूरे परिवार की खुशहाली के लिए माँका विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करती आई हैं।
इस अवसर पर नगर पालिका के सभासद मनोज जगाती ने भी सुहागिन महिलाओं की कामना पूरी हो इसके लिए मां से विनती की।

रिपोर्ट। ललित जोशी।
नैनीताल।

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