सरकारी शराब दुकान खुली, लेकिन कोचियों की मानो लग गई लॉटरी!सरकार का उद्देश्य सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाना और कोचियों की गतिविधियों पर रोक लगाना है। लेकिन राजनांदगांव जिले के चिचोला-रंगीटोला स्थित सरकारी शराब दुकान को लेकर हालात इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहे हैं।स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि दुकान खुलने के समय से लेकर बंद होने तक बड़ी संख्या में कथित शराब कोचिए भारी मात्रा में शराब खरीदकर आसपास के गांवों में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इससे शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।सुबह दुकान खुलने से पहले ही शुरू हो जाता है अवैध कारोबारसूत्रों के अनुसार, सरकारी दुकान से खरीदी गई शराब अगले दिन सुबह दुकान खुलने से पहले ही अधिक कीमत पर बेची जाती है। आरोप है कि दिनभर कोचिए लगातार शराब खरीदते हैं और देर रात तक इसकी सप्लाई जारी रहती है। यदि यह सच है, तो सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब एक ही व्यक्ति या समूह को कैसे उपलब्ध हो रही है?मिलीभगत के आरोप, जिम्मेदार कौन?स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधियां खुलेआम होती हैं। ऐसे में यह मानना कठिन है कि इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस या आबकारी विभाग को नहीं होगी। लोगों का आरोप है कि निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में शराब की बिक्री बिना संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी के संभव नहीं है। यदि आरोप सही हैं, तो यह पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।शिकायत के बाद भी केवल खानापूर्ति?ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आबकारी विभाग को शिकायत करने के बावजूद केवल औपचारिक जांच कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यदि शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रहती है।जनता के सवालक्या सरकारी शराब दुकान से नियमों के विरुद्ध अधिक मात्रा में शराब बेची जा रही है?यदि हां, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या स्थानीय पुलिस और आबकारी विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे?क्या शासन इस कथित अवैध नेटवर्क को समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाएगा?प्रशासन से मांगस्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं सहायक आबकारी आयुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दुकान के सीसीटीवी फुटेज, बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर तथा प्रतिदिन की बिक्री का ऑडिट कराया जाए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

रिपोर्ट : एन. के. सिन्हा.

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