ईमानदार सिस्टम तभी बनेगा जब समाज सच बोलने वालों के साथ खड़ा होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना सिर्फ अफसर का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है।
2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अचानक इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने लिखा “वेतन तो मिल रहा है, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं मिल रहा, ऐसे पद पर बने रहना व्यर्थ है।” इसे उन्होंने अपना नैतिक निर्णय बताया। यही वही अधिकारी हैं जिन्होंने 2009 में मुजफ्फरनगर में 100 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया था और सच उजागर करने की कीमत उन्हें 7 गोलियां खाकर चुकानी पड़ी। एक आंख की रोशनी चली गई, जबड़ा टूट गया, लेकिन हौसला नहीं टूटा। 13वें प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर IAS बने । लेकिन आरोप है कि सख्त कार्रवाई के बाद उन्हें लंबे समय से सक्रिय पोस्टिंग नहीं दी गई। अब उनका इस्तीफा प्रशासनिक गलियारों में बड़ा सवाल बन गया है ? क्या ईमानदार अफसर सिस्टम में टिक नहीं पाते?
क्या सच बोलने की कीमत साइडलाइन होना है?

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