क्या सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा मिल रही है… या उनके हक का पैसा कोई और खा रहा है? उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मिड डे मील, सरकारी फंड और पढ़ाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खंदौली ब्लॉक के लालगढ़ी स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय को लेकर गांव के अभिभावकों ने बड़ा आरोप लगाया है कि यहां बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
अभिभावकों का कहना है कि पिछले चार महीनों से स्कूल में मिड डे मील बना ही नहीं, लेकिन रजिस्टर में रोज भोजन वितरण दर्ज किया जा रहा है और संबंधित धनराशि भी निकाली जा चुकी है। यानी कागजों में बच्चों को खाना परोसा जा रहा है, लेकिन हकीकत में उनकी थालियां खाली हैं। सरकारी नियमों के अनुसार सोमवार को फल और बुधवार को दूध दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन अभिभावकों का दावा है कि बच्चों को न फल मिला और न दूध। अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि इन मदों का पैसा आखिर गया कहां।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिक्षक संकुल फंड को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 का फंड निकाल लिया गया, लेकिन संबंधित लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। एक शिक्षक के 5250 रुपये निकाले जाने का भी आरोप है, जो अब तक उन्हें नहीं मिले।
पढ़ाई को लेकर भी गंभीर शिकायतें हैं। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में कक्षाएं नियमित रूप से नहीं चलतीं और बच्चे पढ़ाई की बजाय खेलते रहते हैं। कुछ जिम्मेदार शिक्षकों पर झूठे आरोप लगाकर गलत रिपोर्ट भेजे जाने की बात भी सामने आई है।
गांव वालों का कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत BEO कार्यालय से की, जांच भी हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि शिकायतों को दबा दिया जाता है और झूठी जांच दिखाकर मामला शांत करा दिया जाता है।
अब अभिभावकों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि बच्चों के अधिकार सुरक्षित रह सकें और यदि आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

