डोंगरगढ़ में किसानों और स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवालडोंगरगढ़।धर्मनगरी डोंगरगढ़ में प्रस्तावित परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब स्थानीय नागरिकों और किसानों ने परियोजना की आवश्यकता और उसके पीछे की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि डोंगरगढ़ में पहले से ही प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त और बेहतर मार्ग मौजूद हैं, ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च कर नई परियोजना लाने की जरूरत समझ से परे है।स्थानीय लोगों के अनुसार डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी मंदिर ही रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के कारण छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, ऑटो चालकों और स्थानीय लोगों की आजीविका चलती है। इसके अलावा क्षेत्र में रोजगार के अन्य बड़े साधन नहीं हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि सरकार को रोजगार और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि विवादित परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने चाहिए।“प्रज्ञागिरी और चंद्रगिरि तक पहले से बेहतर रास्ते”स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रज्ञागिरी जाने के लिए पहले से अच्छा और व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध है। वहीं चंद्रगिरि तक पहुंचने के लिए भी सरल और सुलभ रास्ता बना हुआ है। लोगों के मुताबिक केवल जटाशंकर मंदिर जाने वाले मार्ग में कुछ सुधार और सड़क चौड़ीकरण की जरूरत है, जिसे कम लागत में आसानी से किया जा सकता है।लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब अधिकांश धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए पहले से मार्ग उपलब्ध हैं, तो फिर पूरे नए परिक्रमा पथ निर्माण की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है?“करोड़ों के मुआवजे का खेल?”परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा करोड़ों रुपये के संभावित मुआवजे को लेकर हो रही है। स्थानीय लोगों और प्रभावित किसानों का आरोप है कि निजी भूमि खरीद के नाम पर कुछ लोगों को भारी आर्थिक लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।लोगों का कहना है कि यदि सरकारी और राजस्व भूमि उपलब्ध है, तो निजी जमीन अधिग्रहण पर जोर देना कई सवाल खड़े करता है। नागरिकों का आरोप है कि परियोजना की आड़ में कुछ भू-माफिया और जमीन कारोबारी सक्रिय हो गए हैं, जो जमीनों की कीमत बढ़ने और मुआवजे के खेल से फायदा उठाना चाहते हैं।पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर भी उठे सवालस्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि परिक्रमा पथ परियोजना करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य और मुआवजे से जुड़ी होने के कारण कुछ विभागीय अधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन सकती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों का कहना है कि परियोजना की लागत, रूट चयन और निजी भूमि खरीद की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।नागरिकों का कहना है कि यदि परियोजना पूरी पारदर्शिता के साथ बनाई जा रही है, तो प्रशासन को सभी दस्तावेज, नक्शे और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर हो सकें।“विकास के नाम पर विवाद क्यों?”स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर यदि अनावश्यक परियोजनाएं लाई जाएं और करोड़ों रुपये खर्च किए जाएं, तो उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों की मांग है कि पहले रोजगार, स्वास्थ्य, पेयजल और स्थानीय जरूरतों पर ध्यान दिया जाए।फिलहाल परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर डोंगरगढ़ में बहस और विरोध दोनों तेज हो चुके हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन सवालों का जवाब किस तरह देता है और क्या परियोजना को लेकर लोगों के सामने पूरी पारदर्शिता रखी जाती है या नहीं।

:-𝗥𝗮𝗷𝗲𝘀𝗵 𝗦𝗼𝗻𝗶

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