विश्व धरोहरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल!
ताज की नगरी आगरा में इतिहास खतरे में है और जिम्मेदार विभाग सो रहा है। विश्व धरोहर ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा और फतेहपुर सीकरी— ये वो धरोहरें हैं जिन पर पूरी दुनिया गर्व करती है, लेकिन अब इन्हीं धरोहरों के चारों ओर अवैध निर्माणों का जाल फैल चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन तीनों विश्व धरोहरों समेत आगरा के 154 संरक्षित स्मारकों के आसपास कुल 3,913 अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं, और पिछले 10 वर्षों में एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामला इतना गंभीर हुआ कि अब इलाहाबाद हाईकोर्ट को सख्ती दिखानी पड़ी है। हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। RTI से हुए खुलासे में सामने आया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पिछले दस वर्षों में

किसी अतिक्रमणकारी पर जुर्माना नहीं लगाया
• किसी का दोष सिद्ध नहीं हुआ
• सिर्फ FIR दर्ज कर विभाग ने जिम्मेदारी पूरी मान ली
यानी कागज़ों में कार्रवाई लेकिन जमीन पर अतिक्रमण जारी। स्थिति यह है कि ताजमहल के पूर्वी गेट से असद गली तक अवैध निर्माणों की बाढ़ आ चुकी है। सिर्फ पिछले एक महीने में 15 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं। वहीं आगरा किले के 200 मीटर प्रतिबंधित दायरे में भी निर्माण रुकने का नाम नहीं ले रहे। फतेहपुर सीकरी में चार हिस्सा से हिरन मीनार तक कब्जे हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले तीन महीनों में अकबर और मरियम के मकबरों के पास 100 से ज्यादा FIR दर्ज हुईं, लेकिन जमीनी हकीकत वही है, अतिक्रमण जस का तस। विरासत संरक्षण कार्यकर्ता आकाश वशिष्ठ का बड़ा आरोप है कि ASI आंकड़ों के नाम पर संस्कृति मंत्रालय और जनता को गुमराह कर रहा है। सितंबर 2023 और अप्रैल 2025 की RTI में अवैध निर्माणों की संख्या एक समान 3913 दिखाई गई। अब सवाल उठता है, क्या नए अवैध निर्माण छुपाए जा रहे हैं? क्या जिम्मेदार अफसर सच्चाई दबा रहे हैं? सबसे बड़ा सवाल, जब विश्व धरोहर ही सुरक्षित नहीं, तो इतिहास कैसे बचेगा? हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब देखना होगा, क्या इस बार कार्रवाई होगी, या फिर इतिहास यूं ही अवैध निर्माणों में दबता रहेगा?

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