नई दिल्ली/चित्तौड़गढ़, 27 मार्च। चित्तौडगढ़ सांसद सांसद सीपी जोशी ने लोकसभा में ई-मित्र सेवा केन्द्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए सरकार का ध्यान ई-मित्र संचालकों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि ई-मित्र सेवा केन्द्र डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को जमीनी स्तर तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बन चुके हैं।

सांसद सीपी जोशी ने कहा कि आज राजस्थान सहित देश के अनेक क्षेत्रों में ई-मित्र केन्द्र आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लाखों लोग विभिन्न सरकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों, बिल भुगतान, पंजीकरण और अनेक ऑनलाइन सेवाओं का लाभ इन्हीं केन्द्रों के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार ई-मित्र केन्द्र सरकार और आमजन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में कार्य कर रहे हैं।

सांसद सीपी जोशी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद ई-मित्र संचालक निरंतर नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं, किन्तु वर्तमान में उन्हें अनेक व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सांसद जोशी ने सरकार से आग्रह किया कि ई-मित्र संचालकों को मिलने वाले कमीशन की दरों में वृद्धि की जाए तथा उनकी सेवाओं के अनुरूप दरों का पुनः निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि संचालकों को अपने केन्द्रों का किराया, बिजली, इंटरनेट, मशीनों का रख-रखाव सहित अन्य सभी खर्च स्वयं वहन करने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ता है।

सांसद सीपी जोशी ने यह भी कहा कि कई बार पोर्टल और विभागीय सर्वर डाउन होने के कारण कार्य बाधित हो जाता है, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए डिजिटल सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए तकनीकी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि कई बार आवेदकों द्वारा दस्तावेजों में त्रुटियां होने के बावजूद उसकी जिम्मेदारी ई-मित्र संचालकों पर आ जाती है, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और संतुलित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में भुगतान कट जाने के बावजूद सेवा पूरी नहीं हो पाती, जिससे नागरिकों को परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में समयबद्ध रिफंड प्रणाली तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की भी आवश्यकता है।

सांसद सीपी जोशी ने सरकार से आग्रह किया कि ई-मित्र सेवा केन्द्रों के सुदृढ़ीकरण, तकनीकी व्यवस्था के सुधार और संचालकों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाए जाएँ, ताकि डिजिटल सेवाओं का लाभ आम नागरिकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सके।

रिपोर्ट केलास तेली भींडर उदयपुर राजस्थान

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