जनता को एकजुट करना सांझा उद्देश्यों सम्मान मूल्यों और आपसी विश्वास के माध्यम से विविधतापूर्ण लोगों को राष्ट्र का समुदाय के हित में एक साथ लाना है
सामाजिक आर्थिक विकास, सुरक्षा, चुनौतियां से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है: गुरबख्श सिंह सहोता
भारतीय मानवाधिकार महासंघ के प्रदेश प्रभारी गुरबख्श सिंह सहोता, पंजाब प्रदेश सचिव रमन तंगरालीयां और मुकेरियां प्रभारी लेखराज ने बताया कि सामाजिक समरसता का अर्थ ही समाज को एकजुट कर पारस्परिक भेदभाव को समाप्त करना है यह कार्य किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं है इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है यह एक सामाजिक ज़रूरत है भेदभाव की इस बुराईयों का खात्मा जागरूक समाज के द्वारा ही किया जा सकता है तभी जाकर समाज मे वास्तविक समरसता का भाव उत्पन्न होगा लोगों को जागरूक करने के लिए अपनत्व का भाव जगाने की आवश्यकता है कुंठित मनो की विषमता की भावना को दूर करने की आवश्यकता है यह भावना दूर करने के लिए उनके साथ परस्पर प्रेम एवं सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है इससे सभी लोग जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र की उन्नति में सहयोग करेंगे इससे राष्ट्रीय एकता स्थापित होगा
यदि किसी राष्ट्र का समाज संगठित होता है तो बाहरी शक्तियां भी उस राष्ट्र के विरुद्ध किसी षड्यंत्र में सफल नहीं हो सकती भारत के लोगों को इस बात का आभास हो जाएं और वह आत्म साक्षात्कार कर पाएं एवं अपनी शक्ति को पहचानें
आवश्यकता है लोगों को परस्पर प्रेम एवं सहयोग के प्रति जागरूक करने कि ताकि सामाजिक समरसता का अर्थ महाकुंभ की तरह सही रुप मे साकार हो सकें जातिगत कोई भेदभाव नहीं यही भाव से सामाजिक मे व्यवस्था में समता एक श्रेष्ठ तत्व है देश के संविधान में इसे प्राथमिकता दी गई है मुट्ठीभर लोगों के हाथ में ही रहा है जनता उन्नति के पथ पर अग्रसर नहीं हो सकीं इस स्थिति में से हमें अगर फिर से ऊपर उठना है इस लिए अच्छे कार्यकर्ता होना जरूरी है

