“आस्था पर आग! जैतखाम जलाने की साजिश, सतनामी समाज उबाल पर — प्रशासन बेखबर या बेबस?”
“लोरमी में फिर जला जैतखाम, दंगाई सोच बेनकाब — सवालों के घेरे में शासन-प्रशासन”“जैतखाम पर हमला, सामाजिक सौहार्द पर वार — आखिर कब जागेगा प्रशासन?”“आस्था जलती रही, फाइलों में दबता…
