एडवोकेट बार एसोसिएशन, जनपद बरेली की ओर से बरेली बार एसोसिएशन की नवीनीकरण प्रक्रिया, निर्वाचन, सदस्यता एवं मतदाता सूची, अधिवक्ता कल्याण निधि, वित्तीय लेन-देन, चैंबर व सीट आवंटन समेत विभिन्न मामलों को लेकर अभिलेखीय स्पष्टीकरण तलब किया गया है। एसोसिएशन को निर्धारित 15 दिनों के भीतर लिखित जवाब संबंधित अभिलेखों के साथ प्रस्तुत करने को कहा गया है।
नोटिस में बार काउंसिल से नवीनीकरण के दौरान निर्धारित नियमावली के बिंदुओं का पालन किए जाने के संबंध में प्रमाण-पत्र और अभिलेख मांगे गए हैं। इनमें संबद्धता प्रमाण-पत्र, सदस्यों की नाम, पंजीकरण संख्या, पता, सीओपी नंबर और मोबाइल नंबर सहित सूची, कुल सदस्य संख्या, सदस्यता प्रमाण-पत्र, कार्यक्षेत्र परिसीमन प्रमाण-पत्र, नोटरी शपथपत्र तथा सोसाइटी पंजीकरण और पंजीकृत बाइलॉज से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं।
नोटिस में यह भी पूछा गया है कि संस्था उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से संबद्ध है या नहीं। संबद्ध होने की स्थिति में संबद्धता प्रमाण-पत्र, संख्या, दिनांक और संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं, संबद्धता नहीं होने की स्थिति में ‘बार एसोसिएशन’ शब्द के प्रयोग के वैधानिक अथवा नियामक आधार की जानकारी मांगी गई है।
निर्वाचन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
नोटिस में पिछले चुनावों की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसमें मॉडल बाइलॉज के अनुरूप एक वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचन कराए जाने तथा एक ही व्यक्ति के बार-बार उसी पद पर निर्वाचित या पदस्थ होने के आधार और संबंधित नियमों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही निर्वाचन से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मतदाता सूची में सदस्यों की पात्रता पर सवाल
पिछली मतदाता सूची को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। नोटिस में कथित रूप से दो बार एसोसिएशन की सदस्यता रखने वाले, बरेली में प्रैक्टिस नहीं करने वाले अथवा वेतनभोगी/सेवायोजित अधिवक्ताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने का आधार पूछा गया है। ऐसे अधिवक्ताओं के संबंध में सदस्यता आवेदन, पात्रता और अन्य संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया है।
वित्तीय मामलों का मांगा पूरा हिसाब
नोटिस में संस्था की आय-व्यय, बैंक खातों, प्राप्तियों और भुगतानों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अधिवक्ता कल्याणकारी समिति के गठन, वर्तमान स्थिति, बैंक खाते, आय-व्यय और उपलब्ध धनराशि का विवरण भी मांगा गया है।
इसके अलावा अधिवक्ताओं के चालानों के निस्तारण के लिए प्रति चालान 100 रुपये लिए जाने की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी मांगी गई है। कितने चालानों का निस्तारण हुआ, कितनी धनराशि एकत्रित हुई, उसका उपयोग किस मद में किया गया और वर्तमान में कितनी राशि शेष है, इसका पूरा लेखा-जोखा मांगा गया है।
वाहन स्टिकर और सीट आवंटन पर भी स्पष्टीकरण
अधिवक्ताओं के वाहनों के लिए स्टिकर जारी किए जाने की घोषणा के अनुपालन में हुई कार्रवाई का विवरण भी मांगा गया है। यदि स्टिकर जारी नहीं किए गए तो इसके कारण बताने को कहा गया है।
इसके साथ ही अधिवक्ताओं को उनके विधि व्यवसाय के स्थान, चैंबर, सीट अथवा निर्धारित स्थान से हटाने या आवंटन किए जाने के संबंध में आदेश, प्रस्ताव, अनुमति और कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा गया है। कचहरी परिसर में उपलब्ध अथवा रिक्त अधिवक्ता सीटों के आवंटन की प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति की सूची भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता और चैंबर आवंटन का मामला
नोटिस में अधिवक्ताओं की मृत्यु के बाद उनके परिजनों अथवा संबंधित अधिवक्ताओं को दी गई आर्थिक सहायता तथा बार एसोसिएशन से इस मद में आहरित धनराशि का विवरण भी मांगा गया है।
वहीं, अधिवक्ता कल्याण एवं हित के लिए छोड़ी गई भूमि पर कनिष्ठ अधिवक्ताओं को चैंबर बनाने के नाम पर कथित रूप से धनराशि लिए जाने के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। चैंबर आवंटन के अधिकार और बार काउंसिल से संबद्धता के संदर्भ में संबंधित अनुमति एवं वैधानिक आधार प्रस्तुत करने को कहा गया है। दोनों बार द्वारा चैंबर आवंटित किए जाने की स्थिति में उसके प्रभाव के संबंध में भी जानकारी मांगी गई है।
नोटिस में कहा गया है कि उपरोक्त सभी बिंदुओं पर 15 दिनों के भीतर स्पष्ट लिखित जवाब और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं। निर्धारित अवधि में संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होने पर उपलब्ध अभिलेखों और परिस्थितियों के आधार पर विधि एवं नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

बरेली

अमित कुमार कश्यप

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