

*राजनांदगांव के जोरातराई में पांचवीं के बाद पढ़ाई का मतलब—रेल पटरी पार करो, फिर भविष्य संवारो!**विधानसभा अध्यक्ष की पहल भी फाइलों में कैद? जिम्मेदारों से ग्रामीणों का सीधा सवाल—मिडिल स्कूल के लिए आखिर कब तक इंतजार?*राजनांदगांव। सरकार गांव-गांव तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने और हर बच्चे को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन राजनांदगांव जिले के ग्राम पंचायत जोरातराई के बच्चों की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां पांचवीं कक्षा तक तो बच्चों को गांव में ही शिक्षा मिल जाती है, लेकिन इसके बाद पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें ग्राम मनगटा स्थित मिडिल स्कूल का रुख करना पड़ता है। इस रास्ते में रेलवे क्रॉसिंग पड़ती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी बड़ा सवाल बन गई है।करीब 3500 की आबादी वाले जोरातराई में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला में लगभग 250 बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। इन बच्चों में से पांचवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन मनगटा जाना पड़ता है। किताब-कॉपी लेकर स्कूल जाने वाले इन नौनिहालों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई नहीं, बल्कि रास्ते में आने वाली रेलवे पटरी है।ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे क्रॉसिंग पर गेट बंद होने की स्थिति में कई बार बच्चों और उनके साथ आने-जाने वाले लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। जल्द स्कूल पहुंचने की हड़बड़ी में पटरी पार करना या बंद रेलवे गेट के आसपास से निकलने का जोखिम भी पैदा हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक इस रेलवे क्रॉसिंग पर पूर्व में हादसे भी हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार क्यों कर रहा है?क्या शिक्षा पाने के लिए बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?यह सवाल केवल जोरातराई के ग्रामीणों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जो बच्चों को देश का भविष्य कहती है। एक ओर सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक गांव के बच्चे सिर्फ इसलिए असुरक्षित रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं क्योंकि उनके गांव में पांचवीं के बाद की शिक्षा की व्यवस्था नहीं है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जोरातराई की प्राथमिक शाला को माध्यमिक शाला में उन्नयन कर दिया जाए तो सैकड़ों बच्चों को प्रतिदिन रेलवे क्रॉसिंग पार करने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।ग्राम सरपंच रमाकांत साहू के द्वारा लंबे समय से शाला उन्नयन की मांग की जा रही है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग भी की गई है।ग्रामीणों के अनुसार, *विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की ओर से भी शाला उन्नयन को लेकर पहल किए जाने का उल्लेख किया गया है।* इसके बावजूद अब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।ग्रामीणों की पीड़ा यह है कि नेताओं और अधिकारियों के स्तर पर पहल और पत्राचार तो होता है, लेकिन जमीन पर स्कूल की सुविधा कब पहुंचेगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। यही वजह है कि ग्रामीण अब सवाल कर रहे हैं कि क्या बच्चों के भविष्य से जुड़ी फाइलें भी सरकारी दफ्तरों में रेलवे क्रॉसिंग की तरह लाल झंडी का इंतजार कर रही हैं?ग्राम सरपंच रमाकांत साहू, उपसरपंच महेंद्र कुमार साहू, पंचायत सचिव शिवकुमार साहू सहित पालकों और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। यदि जल्द ही शाला उन्नयन की दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।अब जिम्मेदारी कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, स्थानीय विधायक, प्रभारी मंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के सामने है। उन्हें तय करना होगा कि जोरातराई के बच्चों को सुरक्षित और सहज शिक्षा का अधिकार कब मिलेगा।क्योंकि सवाल केवल एक स्कूल का नहीं, सैकड़ों बच्चों की जिंदगी और उनके भविष्य का है।*जोरातराई के बच्चों का सवाल सीधा है—मिडिल स्कूल आखिर कब?*क्या किसी हादसे के बाद स्कूल खुलेगा, या हादसा होने से पहले सरकार जागेगी?
रिपोर्टर – एन के सिन्हा*
03 सितम्बर 2026
