फरीदाबाद सत्युग दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SDIET) में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विधिक जागरूकता एवं जेंडर सेंसिटाइजेशन सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विधिक अधिकारों, कार्यस्थल की सुरक्षा तथा लैंगिक समानता के प्रति जागरूक करना था, ताकि वे अपनी शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत से ही इन महत्वपूर्ण विषयों को समझ सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि वक्ता के स्वागत एवं संक्षिप्त परिचय के साथ हुआ। सत्र की मुख्य वक्ता एडवोकेट विजय श्री अत्री, जो कि एक मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट, POSH एवं POCSO विशेषज्ञ तथा उद्यमी (Entrepreneur) हैं, रहीं। उन्हें विजयश्री एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, आरंभ – एक नई शुरुआत तथा संभाऱ्ये सोशल फाउंडेशन द्वारा संस्थान में सत्र लेने हेतु भेजा गया था। इन सामाजिक संगठनों के सहयोग से यह जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
एडवोकेट विजय श्री अत्री ने कार्यरत महिलाओं के लिए कानून विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने इस अधिनियम का ऐतिहासिक संदर्भ भी समझाया, जिसकी उत्पत्ति राजस्थान के ऐतिहासिक ‘विशाखा दिशा-निर्देश’ प्रकरण से हुई थी, जिसने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कानून निर्माण की नींव रखी।
सत्र के दौरान कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की परिभाषा, उसके प्रकार तथा शिकायत दर्ज कराने की संपूर्ण प्रक्रिया को सरल एवं स्पष्ट शब्दों में समझाया गया। आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की भूमिका एवं जिम्मेदारियों पर विशेष प्रकाश डाला गया। साथ ही यह भी बताया गया कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
यह सत्र डॉ. ऋचा खुगशाल के संयोजन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. संजना, सुश्री सोनिया वालिया, सुश्री वैशाली, सुश्री शिखा, सुश्री नीतू , सुश्री कमलेश, श्री पुष्पराज सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
सत्र में एसडीआईईटी की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की सक्रिय कार्यप्रणाली एवं संस्थान में सुरक्षित, संरक्षित एवं समावेशी वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला गया।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में सम्मान और सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का समापन जेंडर सेंसिटाइजेशन, पारस्परिक सम्मान एवं सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व पर बल देते हुए किया गया। यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक रहा, जिससे विद्यार्थी कानूनी प्रावधानों एवं लैंगिक समानता के प्रति अधिक जागरूक और सशक्त बने।

फरीदाबाद, हरियाणा।
मोहित सक्सेना।
