

मनरेगा पर मोदी सरकार का वार, गरीबों के काम के अधिकार पर कुठाराघात-शफी अहमद का बड़ा आरोपबलरामपुर मनरेगा संग्राम के जिला प्रभारी एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शफी अहमद ने जिला मुख्यालय बलरामपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म कर श्रमिकों से उनका संवैधानिक काम का अधिकार छीना जा रहा है, जो सीधे तौर पर मजदूर विरोधी और महात्मा गांधी के आदर्शों के खिलाफ है।शफी अहमद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर लोकसभा में एक और बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को कमजोर करने का षड्यंत्र रचा है। यह कदम गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण भारत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मनरेगा अब तक संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े अधिकार के रूप में लागू थी, लेकिन नए फ्रेमवर्क के जरिए इसे कंडीशनल और केंद्र-नियंत्रित योजना में बदल दिया गया है।उन्होंने कहा कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेंद्रीकृत विकास का जीवंत उदाहरण था। मगर इस सरकार ने न सिर्फ गांधीजी का नाम हटाया, बल्कि 12 करोड़ से अधिक मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचल दिया। दो दशकों से मनरेगा ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रही है और कोविड-19 जैसे संकट में आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हुई थी।शफी अहमद ने कहा कि पहले मनरेगा कानून था, जिसके तहत मजदूर अधिकारपूर्वक काम मांग सकते थे। अब इसे सरकार की मर्जी पर चलने वाली योजना बना दिया गया है। नया सिस्टम हर साल तय समय पर रोजगार बंद करने की अनुमति देता है, जिससे सरकार यह तय करेगी कि गरीब कब काम करेंगे और कब भूखे रहेंगे। फंड खत्म होने या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम से दूर रखा जा सकता है।उन्होंने केंद्र सरकार की वित्तीय नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा केंद्रीय कानून था और 90% राशि केंद्र देती थी, अब इसे 60:40 में बदल दिया गया है। साथ ही 50% मैचिंग ग्रांट की शर्त रखी गई है, यानी पहले राज्य पैसा जमा करें तब केंद्र राशि देगा। राज्यों की आर्थिक स्थिति सबको मालूम है—इससे आने वाले समय में मनरेगा का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।शफी अहमद ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार राज्यों पर “V.B.G.RAM.G.” के नाम पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का बोझ डालना चाहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर जनता को गुमराह कर रही है। “V.B.G.RAM.G.” में भगवान राम नहीं, बल्कि “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन–ग्रामीण” का फूल फॉर्म है, जो महज एक राजनीतिक छलावा है।उन्होंने 100 से 125 दिन रोजगार की घोषणा को चालाकी बताया। शफी अहमद के अनुसार, पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत महज 38 दिन का रोजगार मिला है। छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद 70% गांवों में अघोषित रूप से काम बंद है। यानी 11 साल में कोई भी साल ऐसा नहीं रहा जब 100 दिन का रोजगार मिला हो।मनरेगा को कैसे कमजोर किया गया — शफी अहमद की दो टूक तुलनापहले (मनरेगा):हर परिवार को 100 दिन का कानूनी रोजगार अधिकारहर गांव में काम की गारंटीसालभर काम मांगने का अधिकारन्यूनतम मज़दूरी की कानूनी गारंटीपंचायत के जरिए गांव के विकास के काममेट व रोजगार सहायकों की मददमजदूरी का 100% भुगतान केंद्र द्वाराअब (V.B.G.RAM.G.):कोई कानूनी गारंटी नहींसिर्फ चुने हुए गांवों में कामफसल मौसम में काम बंदमजदूरी सरकार तय करेगीकाम की जगह और स्वरूप सरकार तय करेगीमेट/रोजगार सहायक की व्यवस्था खत्ममजदूरी का 40% बोझ राज्यों परअंत में शफी अहमद ने कहा कि यह बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है और कांग्रेस पार्टी मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।इस प्रेसवार्ता के दौरान सफी अहमद के साथ,जिला अध्यक्ष कांग्रेस हरिहर यादव, रिपुजीत सिंहदेव, अब्दुल्लाह, अजय गुप्ता, ,संजीत चौबे, संजीत गुप्ता संजीव गुप्ता, समीर सिंहदेव, छोटू बंगाली, अजय सोनी प्रेमसागर सिंह,रामदेव जगते, जसिम अंसारी, बुद्धदेव पोया, सी बी सिंह,विश्वजीत सिंह देव सुनील गुप्ता अधौरा सहित सैकड़ो पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद थे।
रिपोर्ट : अशफाक खान
