आठ सूत्रीय मांगों को लेकर लेखपालों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है। बरेली में लेखपाल संगठन ने शासन को ज्ञापन भेजकर मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर 17 अक्टूबर 2026 से कार्य बहिष्कार का ऐलान किया गया है।
लेखपालों की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान को लेवल-5 यानी 2800 ग्रेड पे किए जाने, वेतन विसंगति दूर करने, अंतरमंडलीय स्थानांतरण शुरू करने और लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की मांग शामिल है। नवनियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा के परिणाम और प्रमाण-पत्र जारी कर स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी उठाई गई है।
इसके अलावा संगठन ने स्टेशनरी भत्ता 100 से बढ़ाकर 500 रुपये, वाहन भत्ता 1,500 रुपये और विशेष भत्ता 100 से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग रखी है। लेखपालों को अतिरिक्त पटलों से हटाकर मूल कार्य पर लगाने, ग्राम सचिवालयों में आवश्यक सुविधाएं व सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित कर आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।
चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान
संगठन ने मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है। विरोध के विभिन्न कार्यक्रमों के बाद 17 से 23 अक्टूबर तक कार्य बहिष्कार और तहसील मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। इस दौरान मांगों पर समाधान नहीं होने पर 24 अक्टूबर से जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी गई है।
राजस्व सेवाओं पर पड़ सकता है असर
कार्य बहिष्कार का असर राजस्व विभाग से जुड़े कामों पर पड़ सकता है। लेखपालों की जिम्मेदारियों में आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्रों का सत्यापन, वरासत, नामांतरण, पैमाइश, भूमि संबंधी रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्य शामिल हैं। आंदोलन लंबा चलने पर इन सेवाओं के निस्तारण में देरी की आशंका है।
खासकर सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, प्रवेश, नौकरी और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए प्रमाण-पत्रों की आवश्यकता वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।
शासन के फैसले पर नजर
लेखपाल संगठन ने शासन से वार्ता कर मांगों के समाधान की मांग की है। अब देखना होगा कि 17 अक्टूबर से पहले सरकार और संगठन के बीच सहमति बनती है या कार्य बहिष्कार निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू होता है।

रिपोर्ट: सचिन श्याम भारतीय
लोकेशन: बरेली यू पी
