नैनीताल। सरोवर नगरी से बहुत दूर से गोलज्यू जो न्याय कारी देवता के नाम से जाने जाते हैं। उनकी रथ यात्रा चंपावत जनपद से चलकर तमाम क्षेत्रों से गुजरती हुई व जगह जगह जहां गोलज्यू देवता के मंदिर बने हुए हैं। अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए हल्द्वानी पहुँची जहां सैकड़ो भक्तों ने शोभायात्रा में शामिल होकर पुण्य के भागी बने। इसी क्रम में शिक्षिका सुनीता जोशी ने मोबाइल फोन के माध्यम से हमारे जिला संवाददाता ललित जोशी को बताया। उन्होंने कहा गोलज्यू देवता की शोभायात्रा चंपावत से शुरू हुई। टनकपुर, किच्छा होते हुए हल्द्वानी पहुँची। जहां सैकड़ों गोलज्यू देवता के भक्तों ने शोभायात्रा में हिस्सा लिया इस दौरान तमाम श्रद्धालुओं द्वारा भक्तों के लिए जगह जगह पेय पदार्थ एवं फल आदि वितरित किए गये। सुनीता जोशी ने कहा गोलज्यू उत्तराखंड के ही नही अपितु पूरे हिन्दुस्तान के न्याय कारी देवता के रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा जब इंसान हर जगह से आश खो देता है तो वह न्याय की गुहार के लिये गोलज्यू देवता के मंदिर जाता है और अपनी विनती गोलज्यू के समक्ष रखता है । उन्होंने यह भी बताया जहां जहां उत्तराखंड में गोलज्यू के मंदिर है वहाँ लोग श्रद्धा के साथ जाते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिये विनती करते हैं। यहाँ तक गोलज्यू के मंदिर जो नही पहुँच पाता था। वह पत्र के माध्यम से अपनी समस्या को लिख कर भेज देता था तो न्याय कारी गोलज्यू देवता उस भक्त की विनती को सुन लेते थे और उसकी समस्या का निदान कर देते थे। आज भी अल्मोड़ा चितइ गोलज्यू मंदिर में व घोड़ाखाल मंदिर में सैकड़ों की संख्या में विनती पत्र लगे हुए हैं। जब मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो भक्तों द्वारा घण्टे आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं जहां आज भी हजारों की संख्या में घण्टे आदि बधे हुए हैं। आज के युग में भी लोगों का विश्वास पूरा गोलज्यू देवता के प्रति बना हुआ है। गोलज्यू देवता सबकी की मनोकामना पूर्ण करे यही विनती हम सब लोग करते हैं।जबकि कई पुराणों में उत्तराखण्ड को देवभूमि कहा गया है यह वास्तव में देवभूमि ही है । जहां तमाम देवी देवताओं का वास है। उन्होंने कहा अगर आप लोग विश्वास करते हैं तो एक गोलज्यू की धूनी का टीका लगाकर कई लोगों को इसका फायदा मिलता है।
आज जहां स्टिकर, रेडीमेड का समान बाजारों में आ गया है और जल्दी बाजी समय की बचत कर लगा दिया जाता है। पर यहाँ गेरू मिट्टी व चावल से विस्वार बनाकर गोलज्यू देवता की वेदी यानी धुनि को सुंदर ऐपड से सजया गया।

नैनीताल।

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