नारी सशक्तिकरण पर विवाद नहीं, एकजुटता जरूरी — यही है विकसित भारत की पहचान

फरीदाबाद।
नारी शक्ति के अधिकारों को लेकर देश में बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि क्या महिलाओं के सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति उचित है। विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध कहीं न कहीं मातृशक्ति के प्रति अपमानजनक मानसिकता को उजागर करता है।
नारी किसी भी समाज की आधारशिला होती है। जिस समाज में महिलाओं को सम्मान, अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, वही समाज वास्तविक प्रगति करता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी सशक्तिकरण केवल सामाजिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त बन चुका है।
वर्तमान में देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि महिलाओं को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने की ताकत और नेतृत्व का अवसर भी मिले। बीते वर्षों में शिक्षा, रोजगार और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनका प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है।
आज महिलाएं प्रशासन, विज्ञान, खेल, व्यापार और राजनीति जैसे क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर नारी शक्ति किसी भी चुनौती को पार कर सकती है।
हालांकि, इस बीच विपक्ष के कुछ दलों द्वारा नारी सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों का विरोध किया जाना राजनीतिक बहस को जन्म दे रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह का विरोध लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास की भावना के खिलाफ है।
हरियाणा सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “नारी शक्ति का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं के सशक्तिकरण पर राजनीति करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह हमारे सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।”
उन्होंने आगे कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वास्तविक सशक्तिकरण तब ही संभव है जब परिवार और समाज मिलकर बेटियों को शिक्षा, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह समझती है कि कौन नारी सम्मान के साथ खड़ा है। आने वाला समय यह तय करेगा कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा, लेकिन एक बात स्पष्ट है — नारी शक्ति को अब रोका नहीं जा सकता।

जब नारी सशक्त होगी, तभी राष्ट्र सशक्त होगा। महिलाओं को समान अधिकार और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देना ही एक मजबूत और समृद्ध भारत की नींव है।

फरीदाबाद, हरियाणा।
मोहित सक्सेना।

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