आगरा के सिकंदरा में अकबर का मकबरा के पास नूरी मस्जिद के बगल में नेशनल हाईवे किनारे एक दुकान पर नया निर्माण शुरू होने से विश्व धरोहरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ताज की नगरी आगरा में इतिहास खतरे में दिखाई दे रहा है और जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। आगरा के 154 संरक्षित स्मारकों के चारों ओर अवैध निर्माणों का जाल तेजी से फैल चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन स्मारकों के आसपास कुल 3,913 अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं और पिछले 10 वर्षों में इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामला इतना गंभीर हो गया कि अब इलाहाबाद हाईकोर्ट को सख्ती दिखानी पड़ी है और सरकार से जवाब तलब किया गया है।
आरटीआई से हुए खुलासे के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पिछले दस सालों में न तो किसी अतिक्रमणकारी पर जुर्माना लगाया, न किसी का दोष सिद्ध हुआ, और विभाग केवल एफआईआर दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानता रहा। यानी कागज़ों में कार्रवाई होती रही, लेकिन जमीन पर अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या नए अवैध निर्माण छुपाए जा रहे हैं और क्या जिम्मेदार अफसर सच्चाई दबा रहे हैं? जब विश्व धरोहर ही सुरक्षित नहीं हैं, तो इतिहास कैसे बचेगा।

