क्या चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में नई रेलवे लाइनें बिछाने के लिए कोई सर्वेक्षण कार्य पूरा किया गया है या वर्तमान में कोई प्रस्ताव अनुमोदन के लिए विचाराधीन है – सीपी जोशी
चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में चल रही रेलवे परियोजनाओ (नई लाइन, दोहरीकरण) की अनुमानित लागत का परियोजनावार ब्यौरा क्या है – सीपी जोशी
विगत तीन वर्षों और चालू वित्त वर्ष के दौरान चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिले सहित राजस्थान में पूर्णतः/अंशतः आने वाली 5,666 किमी. लम्बाई के कुल 59 सर्वेक्षणों (25 लाइन और 34 दोहरीकरण) को स्वीकृत किया गया है – अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली/चित्तौडगढ, 18 मार्च। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने आज लोकसभा में संसदीय क्षेत्र की रेलवे सुविधाओं के संबंध में महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से राजस्थान के चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में नई रेलवे लाइनें बिछाने के लिए कोई सर्वेक्षण कार्य पूरा करने अथवा वर्तमान में कोई प्रस्ताव अनुमोदन के लिए विचाराधीन होने, नई रेल परियोजनाओं (नई लाईन, दोहरीकरण) की अनुमानित लागत का परियोजना-वार ब्यौरा और उनकी प्रगति/स्थिति सहित अब तक खर्च राशि, सर्वेक्षण पूरा होने के बाद नई रेलवे लाईनों और दोहरीकरण परियोजनाओं की प्रशासनिक/वित्तिय स्वीकृति की स्थिति, क्या सरकार उक्त जिलों में रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए किसी विशेष प्राथमिक योजना पर काम कर रही है और परियोजनाओं को पूरा होने के बाद क्षेत्रीय आर्थिक विकास, पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन पर पड़ने वाले प्रभावों की संभावनाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण सवाल पूछे।
सांसद सीपी जोशी द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जवाब दिया कि राजस्थान के चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए नीमच – सिंगोली -बेंगू-रावत भाटा-कोटा नई लाइन (201 कि.मी.), मंदसौर-प्रतापगढ़-घाटोल-बांसवाड़ा नई लाइन (120 कि.मी.), नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-अलीराजपुर-नंदुरबार नई लाइन (380 कि.मी.), चित्तौड़गढ़-मावली-देबारी दोहरीकरण (99 कि.मी.) परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण को स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने बताया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के पश्चात, परियोजना को स्वीकृति देने के लिए राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और आवश्यक अनुमोदन यथा नीति आयोग, वित्त मंत्रालय आदि के मूल्यांकन अपेक्षित होता है। चूंकि परियोजनाओं को स्वीकृत करना एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए निश्चित समय-सीमा का निर्धारण विभिन्न हितधारकों के मूल्यांकन और अनुमोदन के आधार पर किया जाता है।
केन्द्रीय रेल मंत्री ने बताया कि नीमच-बड़ीसादड़ी नई लाइन (48 किमी.) 495 करोड़ रूपये की लागत पर कार्य को स्वीकृत किया गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जा चुका है। 7 में से 4 बड़े पुलों का कार्य पूरा हो गया है और शेष पुलों का कार्य शुरू किया गया है। 30 में से 9 आरयूबी का कार्य पूरा हो गया है और शेष आरयूबी का कार्य शुरू किया गया है। 6 में से 2 स्टेशन भवनों का कार्य पूरा हो गया है और शेष स्टेशन भवनों का कार्य शुरू किया गया है।
मावली-देवगढ़ देवगढ़ मदारिया अमान परिवर्तन (83 कि.मी.) 969 करोड़ रूपये की लागत पर कार्य को स्वीकृत किया गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण किया जा चुका है। 10 में से 6 बड़े पुलों का कार्य पूरा हो गया है और शेष पुलों का कार्य शुरू किया गया है। 64 में से 38 आरयूबी का कार्य पूरा हो गया है और शेष आरयूबी का कार्य शुरू किया गया है। 7 में से 4 स्टेशन भवनों का कार्य पूरा हो गया है और शेष स्टेशन भवनों का कार्य शुरू किया गया है।
अज़मेर-चन्देरिया दोहरीकरण (178 कि.मी.) कार्य को 1635 करोड़ रूपये की लागत पर स्वीकृत किया गया है। इसके लिए 114 हेक्ट. में से 75 हेक्ट. का अधिग्रहण किया गया है और शेष भूमि के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू किया गया है। 16 बड़े पुलों का कार्य शुरू किया गया है। 31 आरयूबी का कार्य शुरू किया गया है। 13 में से 1 स्टेशन भवनों का कार्य पूरा हो गया है और शेष स्टेशन भवनों का कार्य शुरू किया गया है।
उमरा-उदयपुर-देबरी दोहरीकरण (25 कि.मी.) परियोजना को दिसम्बर-2025 में 492 करोड़ रूपये की लागत पर स्वीकृत किया गया है। इस परियोजना को ’’विशेष रेल परियोजना’’ के रूप में घोषित किया गया है और भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकरण भी नियुक्त किया गया है। भूमि अधिग्रहण का कार्य आरंभ किया गया है।
केन्द्रीय रेल मंत्री ने बताया कि विगत तीन वर्षों, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों सहित राजस्थान राज्य में पूर्णतः अंशतः आने वाली 5,666 कि.मी लंबाई के कुल 59 सर्वेक्षणों (25 नई लाइन और 34 दोहरीकरण) को स्वीकृत किया गया है।
उन्होंने बताया कि रेल अवसंरचना परियोजनाएँ क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को सक्षम बनाती हैं, जिनमें देश के अन्य भागों के साथ क्षेत्र की बेहतर संपर्कता, माल और सेवाओं की तेज़ आवाजाही, संभार तंत्र दक्षता में सुधार, लाइन क्षमता में बढ़ोतरी, क्षेत्र की जनता के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ाना, परिचालन संबंधी बाधाओं में कमी, पर्यटन उद्योग का विकास और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि आदि शामिल है।

रिपोर्ट केलास तेली भींडर उदयपुर राजस्थान
