
गीदम मामले में पुलिस की एकतरफा करवाई से नाराज पत्रकार। बस्तर में सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील।सुकमा।गीदम थाना क्षेत्र में हाल ही में सामने आए विवादित प्रकरण को लेकर बस्तर संभाग के पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मामले में एक पत्रकार की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर पत्रकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए सोमवार को दंतेवाड़ा सहित बस्तर संभाग के सातों जिलों में मौन धरना प्रदर्शन किया। सुकमा में पत्रकारों ने एक घंटे का मौन धरना देकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने की मांग की।दरअसल, कुछ दिनों पहले गीदम थाना क्षेत्र में एक पत्रकार के परिजनों के साथ हुई घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। वीडियो में बास्तानार के इरपा गांव का एक ग्रामीण लापरवाहीपूर्वक अनियंत्रित ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दे रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका पैदा हो गई थी। इसके बाद घटना स्थल पर ट्रैक्टर चालक के साथ हुई मारपीट का दूसरा वीडियो भी वायरल हुआ। इन वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।घटना के विरोध में विशेष समुदाय के एक समूह ने जिला बंद, उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए। इस बीच पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए पत्रकार और उसके परिजनों के खिलाफ मारपीट की गंभीर धाराओं के साथ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने पत्रकार रौनक शिवहरे को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।हालांकि गिरफ्तारी के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। दूसरे पक्ष की ओर से दंतेवाड़ा पुलिस को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया गया है, जिसमें पत्रकार के परिजनों की गिरफ्तारी की मांग की गई है। इस स्थिति को देखते हुए बस्तर संभाग के पत्रकारों ने पुलिस की कार्रवाई को जल्दबाजी और दबाव में की गई कार्रवाई बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है।दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के आह्वान पर संभाग के सभी जिलों में पत्रकारों ने शांतिपूर्ण तरीके से मौन धरना देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। सुकमा जिला मुख्यालय में आयोजित धरना प्रदर्शन के बाद पत्रकारों ने कलेक्टर अमित कुमार को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की पुनः जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई साथ ही पत्रकारों ने पूरे प्रकरण की बिंदुवार जानकारी देते हुए कहा कि एक छोटे से सड़क हादसे से शुरू हुआ विवाद अचानक गंभीर धाराओं और एट्रोसिटी एक्ट में बदल गया, जो कई सवाल खड़े करता है। पत्रकारों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित किया जाए।इस मौके पर कोंटा, दोरनापाल, छिंदगढ़, कुकनार, तोंगपाल और सुकमा सहित जिले के प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और न्याय नहीं मिलता, तब तक वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
रिपोर्ट : योगेन्द्र सिंह भदौरिया
