बाल श्रम उन्मूलन अभियान के तहत पाटन जिले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला बाल श्रम उन्मूलन टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जिला कलेक्टर ने यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं कि दूसरे राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार मिले….
इस संबंध में, टेंट एसटीपी योजना के तहत पाटन जिले में काम की जगह पर एक अस्थायी शिक्षा प्रणाली स्थापित की गई है। हारिज तालुका के कुकराना क्षेत्र में ईंट भट्टे पर कुल 61 बच्चों के लिए 02 टेंट एसटीपी कक्षाएं शुरू की गई हैं। साथ ही, सिद्धपुर तालुका के कुंवारा और काकोशी क्षेत्रों में ईंट भट्टों पर कुल 129 बच्चों के लिए 09 टेंट एसटीपी कक्षाएं शुरू की गई हैं। कक्षाएं चल रही हैं। इस प्रकार, कुल 11 कक्षाओं में 190 बच्चों को काम की जगह पर ही बाल मित्रों द्वारा प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। बाल मित्रों को हर महीने 7,000 रुपये मानदेय दिया जाता है। बच्चों को नोटबुक, कंपास, पेंसिल, स्लेट और ऑफिस का सामान समेत ज़रूरी पढ़ाई-लिखाई का सामान मुफ़्त में दिया जाता है। इसके अलावा, बच्चों को हर दिन पौष्टिक नाश्ता भी दिया जाता है। इस पहल का मुख्य मकसद यह है कि बाहर से आए मज़दूरों के बच्चे पढ़ाई से दूर न रहें और बाल मज़दूरी जैसे प्रदूषण का शिकार न हों। सरकारी लेबर ऑफिसर, पाटन की प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि उन्हें काम की जगह पर ही पढ़ाई-लिखाई की सुविधाएँ देकर बेसिक शिक्षा दी जा रही है, ताकि वे एक अच्छे भविष्य की ओर बढ़ सकें।





रिपोर्ट – रामजीभाई रायगोर पाटन बनासकांठा
