मुज़फ्फरनगर में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि अब मामला सिर्फ पर्यावरणीय नहीं, बल्कि जन-जीवन की सुरक्षा का बन गया है। शहर की हवा जहरीली होती जा रही है और पेयजल में मिल रही दूषित तत्वों ने स्वास्थ्य संकट को और गहरा कर दिया है। इन चिंताओं को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख़्त हस्तक्षेप करते हुए जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर सीधी जिम्मेदारी तय कर दी है। इसके साथ ही नगर पालिका प्रशासन से भी जवाब तलब किया गया है। यही नहीं अधिकरण ने जनपद की फैक्ट्रियों में आरडीएफ के उपयोग को लेकर गहन जांच के आदेश दिए हैं
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने मुज़फ्फरनगर में बढ़ते वायु और जल प्रदूषण पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए विगत दिवस एक अहम आदेश पारित किया। न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफ़रोज़ अहमद की संयुक्त पीठ ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों और लचर निगरानी के चलते पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, जिसे तत्काल रोके जाने की आवश्यकता है। अधिकरण की इस विशेष पीठ ने प्रदूषण और आरडीएफ उपयोग को लेकर दायर तीन याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई की। इनमें सनव्वर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (ओए 269/2024), सैयद अली अब्बास बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (ओए 121/2024) और गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (ओए 797/2024) की पत्रावलियां शामिल,मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकरण ने इन तीनों याचिकाओं की सुनवाई और निपटारे के लिए अधिवक्ता राहुल खुराना को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया। याचिकाकर्ताओं का पक्ष अधिवक्ता एस.ए. जैदी, मानसी चाहल और कपिल, जबकि प्रतिवादी पक्ष का तर्क प्रियंका स्वामी, विक्रांत पचनंदा, प्रदीप मिश्रा, दलीप ध्यानी, गीगी सी. जॉर्ज, सुनील कुमार, शुभम सखुजा, उत्कर्ष शर्मा, अनुभव आनंद अरोन और अभिनव आनंद ने रखा। अधिकरण की विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मोहम्मद अरशद ने बताया कि प्रदूषण की गंभीरता ने उनके परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है। अरशद ने आरोप लगाया कि शहर में सप्लाई होने वाला पेयजल लगातार दूषित है और इसी वजह से उन्होंने हाल ही में अपने दो परिजन खो दिए। याचिकाकर्ता की इस भावुक गवाही और गंभीर आरोपों का संज्ञान लेते हुए एनजीटी के सख्त निर्देश जारी किये इनमें विशेष तौर पर आरडीएफ की जांच पर जोर दिया गया है। अधिकरण की ओर से यूपीपीसीबी को निर्देश मिला है कि जिले के उद्योगों में इस्तेमाल हो रहे आरडीएफ की विस्तृत जांच की जाये कि ये किस स्रोत से आ रहा है, इसकी गुणवत्ता क्या है और इससे कितना फुगिटिव उत्सर्जन हो रहा है। अधिकरण ने स्पष्ट कहा है कि इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट दाखिल की जाए।
प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम की समीक्षा पर जोर देते हुए अधिकरण ने उद्योगों में लगे एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस, ओसीईएमएस सिस्टम और फ्लाई ऐश के निस्तारण की कार्यशीलता पर विशेष रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में एनजीटी की ओर से डीएम, यूपीपीसीबी सचिव को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही नगरपालिका परिषद् ईओ को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। नगर पालिका को शहर की पेयजल पाइपलाइन और स्रोतों से नमूने लेकर जांच करने तथा दूषित जल आपूर्ति को तुरंत रोकने का निर्देश दिया गया है।

अधिकरण ने कहा कि जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी है। किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। एनजीटी की ओर से इस आदेश की प्रति डीएम, यूपीपीसीबी सचिव और ईओ नगर पालिका को ई-मेल द्वारा भेजते हुए अनुपालन की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 निर्धारित की गई

रिपोर्ट. पंडित जुगनू शर्मा
लोकेशन. मुजफ्फरनगर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *